आयकर अधिनियम, 2025 के व्यापक कार्यान्वयन के साथ सरकार ने एक लक्षित राहत योजना भी शुरू की है — Foreign Assets Disclosure Scheme, 2026। इस योजना के अंतर्गत 1 अक्टूबर 2024 से प्रभावी रूप से उन करदाताओं को अभियोजन से राहत प्रदान की गई है जिन्होंने ₹20 लाख तक मूल्य की गैर-अचल विदेशी परिसंपत्तियों का प्रकटीकरण नहीं किया था।
इस योजना का उद्देश्य मुख्यतः उन करदाताओं को राहत देना है जिनके पास सीमित विदेशी वित्तीय परिसंपत्तियाँ हैं, जैसे विदेश में कार्य या अध्ययन के दौरान खोला गया बैंक खाता, छोटा निवेश पोर्टफोलियो, विदेशी ब्रोकरेज खाता या इसी प्रकार की अन्य वित्तीय संपत्तियाँ। कई मामलों में करदाता इन प्रकटीकरण आवश्यकताओं से अनभिज्ञ रहते हैं और उनका उद्देश्य कर चोरी करना नहीं होता।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह कोई सामान्य माफी योजना (General Amnesty) नहीं है। यह केवल सीमित मूल्य की गैर-अचल विदेशी परिसंपत्तियों पर लागू होती है। बड़े पैमाने की विदेशी होल्डिंग्स, जटिल ऑफशोर संरचनाएँ या विदेश में स्थित अचल संपत्ति इस राहत के दायरे में शामिल नहीं हैं।
इस योजना में 'गैर-अचल परिसंपत्ति' और 'अचल संपत्ति' के बीच अंतर अत्यंत महत्वपूर्ण है। विदेशी बैंक खाते, शेयर होल्डिंग्स या अन्य वित्तीय निवेश, यदि उनकी कुल कीमत ₹20 लाख की सीमा के भीतर है, तो इस योजना के अंतर्गत पात्र हो सकते हैं। इसके विपरीत, विदेश में स्थित मकान, अपार्टमेंट, भूमि या अन्य अचल संपत्तियाँ इस विशेष राहत के अंतर्गत नहीं आतीं।
जिन व्यक्तियों या परिवारों का कोई सदस्य विदेश में रह चुका है, काम कर चुका है या अध्ययन कर चुका है, उनके लिए यह योजना विशेष रूप से प्रासंगिक हो सकती है। कई बार विदेशी बैंक खाते या छोटे निवेश वर्षों तक सक्रिय रहते हैं और उनके प्रकटीकरण की आवश्यकता का ज्ञान नहीं होता।
हालाँकि राहत स्वतः उपलब्ध नहीं होगी। पात्र करदाताओं को निर्धारित प्रकटीकरण प्रक्रिया का सही ढंग से पालन करना होगा। केवल परिसंपत्ति का मूल्य सीमा के भीतर होने से स्वतः छूट नहीं मिलती। यदि आपको लगता है कि यह योजना आपके या आपके परिवार के किसी सदस्य पर लागू हो सकती है, तो किसी विशेषज्ञ सलाहकार से मार्गदर्शन प्राप्त करना उचित होगा।